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Book Code: 1111016936211

Jagram Singh

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पुस्तक के बारे में

साहित्य समाज का दर्पण होता है। समाज अपने अच्छे - बुरे का मूल्यांकन साहित्य के माध्यम से करता है। अत: साहित्य का संबंध् समाज निर्माण के आरम्भिक दिन से ही है। समाज में साहित्य सृजन के सौभाग्य विविध प्रकार प्रचलन में रहे हैं। यह पुष्प जो काव्यांजलि भोर नाम से प्रस्तुत है, उसमें साहित्य की उस पारम्परिक विधा - दोहा, कवित्त के द्वारा आध्यात्मिक और धार्मिक पक्ष का सहारा लेकर मानव मात्र को पग-पग पर सम्भलने की दिशा आदि का बोध होता है। चतुर्थ सोपान की प्राप्ति की सीढ़ी पर एकाग्रचित्त होकर चढ़ने का सौभाग्य प्रदान करता है। इसी नर से नारायण की मंगलयात्रा का साफल्य, साथ ही समुद्र मन्थन से प्राप्त अमृत जो अमरत्व को प्रदान कर जीवन को सुखमय, सानंदमय बनाने का माध्यम है, सहज ही प्राप्त हो जाता है।

लेखक का परिचय

जीवन परिचय
नामः जगराम सिंह
माता का नामः स्व. श्रीमती गोमती देवी
पिता का नामः स्व. श्री इन्दल सिंह
शिक्षाः स्नातकोत्तर - अंग्रेजी
अध्यापनः 1989 से 1994 तक हायर सेकेण्डरी स्कूल में अंग्रेजी विषय का अध्यापन
कार्यक्षेत्राः 1994 से अब तक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक
साहित्य सेवाः
मूल अभिरूचिः अंग्रेजी भाषा में पद्य लेखन (सौ से ऊपर काव्य संग्रहद्ध)
अंग्रेजी व्याकरण में: (1) New Flow of Spoken English
(2) New Flow of General English
हिन्दी भाषा में पद्य साहित्यः

(1) काव्यांज्जलि-भोर (2) काव्यांज्जलि-उदय (3) काव्यांज्जलि-किरण (4) काव्यांज्जलि-प्रभात

हिन्दी भाषा में गद्य साहित्यः
(1) भारत दर्शन (2) माँ (3) सामाजिक क्रांति के शिल्पी (4) समरसता के भगीरथ
(5) उत्सव हमारे प्राण (6) राष्ट्र के गौरव (7) हमारी प्रार्थना

 


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Last updated: 17-Jul-2019   Designed by IndiaPRIDE.com