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Book Code: 1111015811763

J. P. Singh

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ABOUT THE BOOK

श्रीमद्भगवद्गीता हिन्दुओं का ग्रन्थ अवश्य है, लेकिन इसे मात्रा हिन्दुओं का धार्मिक ग्रन्थ  रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।  गीता में जिस जीवन-दर्शन का प्रतिपादन हुआ है वह समस्त मानव जाति के लिए उपयोगी है। गीता पूरी मानव जाति और  उनवेफ विश्वासों एवं मूल्यों का आदर करती है।
गीता किसी विशिष्ट व्यक्ति, जाति, वर्ग, पंथ, देश-काल या किसी रूढ़िग्रस्त सम्प्रदाय का ग्रन्थ नहीं बल्कि यह सार्वलौकिक,  सार्वकालिक धर्मग्रन्थ है। यह प्रत्येक देश, प्रत्येक जाति तथा प्रत्येक स्तर के प्रत्येक स्त्रा-पुरुष वेफ लिए है। इस्लाम में भी  गीता-दर्शन की स्वीकृति है।

गीता सार्वभौम धर्मग्रन्थ है। धर्म वेफ नाम पर प्रचलित विश्व वेफ समस्त ग्रन्थों में गीता का स्थान अद्वितीय है। यह स्वयं में  धर्मशास्त्रा ही नहीं बल्कि अन्य धर्मग्रन्थों में निहित सत्य का मानदण्ड भी है। गीता वह कसौटी है, जिस पर प्रत्येक धर्मग्रन्थ में  वर्णित सत्य अनावृत्त हो उठता है और परस्पर विरोधी कथनों का समाधान निकल आता है। 

गीता में जिस जीवन-दर्शन का प्रतिपादन हुआ है, वह निश्चित रूप से अतुलनीय है। इस पुस्तक को हर समुदाय और  विचारधारा वेफ लोगों को अध्ययन करना चाहिए। गीता में बताये गये रास्ते पर चलने वाले व्यक्ति कभी भी इस लोक या  परलोक में पिछड़ नहीं सकते।

गीता अध्यात्म का एक महान ग्रन्थ है। अन्य धर्म के आलोक में इसकी रचना मानव जाति वेफ हित में की गयी है। यह पूरी  मानवता का पथ-प्रदर्शक है। गीता में विश्वास करने वाला व्यक्ति कभी उग्रवादी और अमानुषिक नहीं हो सकता है। इस पुस्तक में यही प्रयास किया गया है कि गीता के उपदेशों को सरलतम भाषा में आम पाठकों तक बिना किसी पूर्वाग्रह वेफ  पहुँचाया जाये।


ABOUT THE AUTHOR

डॉ. जे. पी. सिंह, एम.ए.(पटना  वि., पटना) एम. फिल (ज.ने.वि., नई  दिल्ली);  पीएच.डी. (ऑस्ट्रेलियन नेशनल यूनिवर्सिटी, केनबेरा)। पूर्व प्रोपेफसर एवं प्रति-कुलपति, पटना विश्वविद्यालय, पटना के रूप में कार्य करने का अनुभव। भारत वेफ प्रख्यात समाजशास्त्रा एवं जनसंख्याशास्त्रा के रूप में पहचान।  लेखक का आध्यात्मिक नाम स्वामी देवधरा है तथा बनारस से इन्हें ज्योतिषशास्त्रा में दैवज्ञश्री की उपाधि्  प्राप्त है।

CONTENTS

प्रस्तावना 7

1- श्रीमद्भवद्गीता के कतिपय लोकप्रिय शलोक- 19

2- महाभारत कथा - 23

महाभारत का इतिहास -23

पुरातत्त्व प्रमाण (1900 ईसा पूर्व से पहले) - 26

महाभारत महाकाव्य की सिंक्षिप्त कथा - 30

महाभारत के वुफछ विशिष्ठ प्रसंग- 44

महाभारत की अनसुनी मिथक व कहानियाँ- 62

महाभारत वेफ कतिपय विस्मयकारी रहसय - 65

3- श्रीमद्भवद्गीता परिचय - 69

गीता का भाष्य - 73

गीता सारांश -79

सिंक्षिप्त गीता रहसय - 90

आधुनिक जीवन और गीता - 92

4- ईशवर, आत्मा, अवतार, और पुनर्जन्म - 97

धर्म और दर्शन में  ई शवर की अवधारणएँ -101

ईशवर की अवधारणा-111

ईशवर एक या अनेक ? -113

आत्मा और उसका पुनर्जन्म-117

5- मूर्तिपूजा वेफ सैद्धान्तिक तथा व्यावहारिक पहलू का
एक अवलोकन - 125

मूर्तिपूजा और इस्लाम -139

भारत मे इस्लाम धर्म -147

धर्म का राजनीतिकरण -155

6- कतिपय अवधारणएँ एवं धार्मिक विशवास - 163

गीता से सम्बन्धित कतिपय मार्मिक विचार -173

श्रीमद्भवद्गीता
अध्याय - 1 (विषादयोग ) - 179

अध्याय - 2 (सांख्ययोग) - 195

अध्याय - 3 (कर्मयोग)- 225

अध्याय - 4 (ज्ञान-कर्मयोग) - 245

अध्याय - 5 (कर्म-सन्यास योग) - 267

अध्याय - 6 (ध्यान योग या आत्मासंयम योग) - 281

अध्याय - 7 (ज्ञान-विज्ञान योग) -301

अध्याय - 8 (अक्षरब्रह्म योग) - 313

अध्याय - 9 (राजविद्या योग) - 325

अध्याय - 10 (विभूति-विस्तार योग) - 343

अध्याय - 11 (विशवरूप दर्शन योग) - 359

अध्याय - 12 (भक्ति योग) - 379

अध्याय - 13 (क्षेत्र- क्षेत्र विभाग योग) - 389

अध्याय - 14 (गुणत्रय विभाग योग)- 405

अध्याय - 15 (पुरूषोत्म योग) - 415

अध्याय - 16 (दैवासुरसंपद् विभाग योग) -425

अध्याय – 17(श्रद्धात्रय विभाग योग)- 435

अध्याय - 18 (मोक्ष संन्यास योग) - 447

7- नितय -पाठ गीता - 475

8- गीता सार एंव गीता उपदेश - 479

श्रीकृष्ण का मानव जीवन जीने का उपदेश -482

श्रीमद्भवद्गीता के कतिपय अनमोल वचन -483

9- ध्यान की एक सहज विधि-487

10- शब्द संग्रह -489


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Last updated: 16-Nov-2018   Designed by IndiaPRIDE.com